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High Court : हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री व आरएसएस के खिलाफ टिप्पणी करने वाले को राहत देने से किया इन्कार

Wed, 06 May 2026 08:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक और राष्ट्रविरोधी पोस्ट साझा करने के मामले में आरोपियों को राहत देने से इन्कार कर दिया है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक और राष्ट्रविरोधी पोस्ट साझा करने के मामले में आरोपियों को राहत देने से इन्कार कर दिया है। न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने सोनभद्र जिले के अनपरा थाने में दर्ज आपराधिक मामले की कार्यवाही और चार्जशीट को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।

सोनभद्र निवासी जुबैर अंसारी और एक अन्य आरोपी पर आरोप है कि उन्होंने फेसबुक पर एक पाकिस्तानी यूट्यूबर की पोस्ट साझा की, जिसमें प्रधानमंत्री और आरएसएस के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां थीं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए आरोपियों को समन जारी किया। आरोपियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है लेकिन इसका उपयोग जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति सामाजिक मर्यादा या कानून की सीमाओं को लांघे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी पोस्ट जो समाज में वैमनस्य या अशांति फैलाने की संभावना रखती हैं, उन्हें संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि समन जारी करने के स्तर पर मजिस्ट्रेट को केवल यह देखना होता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। इस स्तर पर विस्तृत साक्ष्यों की जांच या बचाव पक्ष के तर्कों का मूल्यांकन आवश्यक नहीं होता। हाईकोर्ट ने कहा कि असाधारण शक्तियों का उपयोग बेहद सावधानी से और विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए। इस मामले में कोई कानूनी त्रुटि न पाते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

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