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प्रतीक शर्मा बोले : तकनीक के दम पर जीती जाएंगी भविष्य की जंग, उत्तरी सीमाओं की चुनौतियों के लिए सेना तैयार

Wed, 06 May 2026 08:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्ध अब पारंपरिक हथियारों से कहीं अधिक तकनीक के मोर्चे पर लड़े और जीते जाएंगे।
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न्यू कैंट स्थित कोबरा सभागार में नार्थ टेक सिंपोजियम में बोलते लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्ध अब पारंपरिक हथियारों से कहीं अधिक तकनीक के मोर्चे पर लड़े और जीते जाएंगे। नार्थ टेक सिंपोजियम के दौरान उन्होंने कहा कि उत्तरी सीमाओं पर उभरतीं सुरक्षा चुनौतियों और जटिल भौगोलिक परिस्थितियों से निपटने के लिए भारतीय सेना लगातार अत्याधुनिक तकनीकों को आत्मसात कर रही है।

जनरल शर्मा ने स्वदेशी रक्षा तकनीक, ड्रोन वारफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा को आधुनिक सेना की रीढ़ बताया और कहा कि जवानों का तकनीकी सशक्तीकरण आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। उत्तरी कमान प्रमुख ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराते हुए स्टार्टअप्स और रक्षा उद्योगों को सेना के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का आह्वान किया।

उन्होंने उत्तर प्रदेश में हो रहे रक्षा विनिर्माण और एक्सप्रेसवे के तेजी से विकास की सराहना करते हुए कहा कि निजी उद्योग, सरकारी संस्थान और सशस्त्र बलों की आपसी साझेदारी ही देश को अत्याधुनिक रक्षा क्षमताओं से लैस कर सकती है। यह आयोजन मुख्य रूप से जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और नवाचार के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य सेना की परिचालन संबंधी बाधाओं के लिए स्थानीय और तकनीकी समाधान तलाशना है।

सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के सहयोग से आयोजित इस तीन दिवसीय सिंपोजियम ने देश भर के नवोन्मेषकों और रक्षा विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान किया है। जनरल शर्मा ने जोर देकर कहा कि इस तरह के मंचों से भारतीय रक्षा उद्योगों को सीधे सैनिकों की जमीनी जरूरतों को समझने का अवसर मिलता है। अत्याधुनिक सर्विलांस सिस्टम और ड्रोन तकनीक पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि स्वदेशी नवाचार न केवल सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाएंगे, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति को भी मजबूत करेंगे।

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