गाजियाबाद में 2000 में हुई एक हत्या के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषियों की आजीवन कारावास की सजा को गैर इरादतन हत्या में बदल दिया। कोर्ट ने जेल में बिताए गए लगभग 23 साल को न्याय के लिए पर्याप्त मानते हुए उन्हें रिहा करने फैसला सुनाया। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की खंडपीठ ने दिया है।
गाजियाबाद के थाना सिहानी गेट अंतर्गत मालीवाड़ा चौक पर फल की रेहड़ी लगाने को लेकर फरवरी-2000 में विवाद हुआ था। सगे भाई राशिद और यूसुफ ने पप्पू के साथ मारपीट की और चाकू से हमला कर हत्या कर दी। ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2009 को दोनों भाइयों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सगे भाइयों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी।
याची अधिवक्ता मोहम्मद समीउज्जमा खान ने दलील दी कि हत्या पूर्व नियोजित नहीं थी। विवाद अचानक हुआ और उग्र रूप धारण कर लिया। कोर्ट ने पाया कि मृतक के शरीर पर केवल एक ही घाव घातक था। कोर्ट ने दोष सिद्धि को धारा 302 (हत्या) से बदलकर गैर-इरादतन हत्या में परिवर्तित कर दिया।