राज्यपाल रामनाईक का कहना है कि मध्यस्थता मुकदमों के निस्तारण का सबसे बेहतर जरिया है, इसमें किसी की हार नहीं होती है। पक्षकारों के बीच आपसी सुलह से विवाद निपट जाता है। इसमें व्यय भी बहुत कम होता है। राज्यपाल शनिवार को हाईकोर्ट में ‘मध्यस्थता त्वरित व सस्ते न्याय का माध्यम’ विषय पर आयोजित व्याख्यान मुख्य अतिथि के तौर पर बोल रहे थे। उन्होंने तारापुर ऊर्जा केंद्र के विस्तार हेतु भूमि अधिग्रहण के बाद विस्थापित लोगों को उनका हक दिलाने के लिए 2004 से चल रहे मुकदमे का जिक्र किया और कहा कि वहां भी मध्यस्थता की आवश्यकता है।
मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले ने बताया कि मीडिएशन को लेकर वकीलों में भ्रम है। मीडिएशन सेटलमेंट नहीं है। इसकी कहीं स्पष्ट व्याख्या नहीं है। मध्यस्थता को देखना होगा कि विवाद का हल किस प्रकार से निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता विवादों के हल का सबसे बेहतर जरिया है। न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता ने विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मध्यस्थता बिना खर्च के विवाद के निस्तारण का सबसे बेहतर तरीका है। इसके जरिए मुकदमों की संख्या में कमी लाई जा सकती है। कार्यक्रम में अधिवक्ता निर्मल कुमार चतुर्वेदी की दो पुस्तकों का विमोचन किया गया। नाटक ‘मुकदमा होने वाला है’ कि डीवीडी भी लांच की गई। इस नाटक की प्रस्तुति हाईकोर्ट के 150वें स्थापना दिवस के उद्घाटन समारोह के मौके पर की गई थी।