इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिविल वाद में दाखिल फर्जी दस्तावेज पेश करने के आरोप में मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कानपुर नगर के समक्ष चल रहे आपराधिक केस कार्यवाही को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि दस्तावेज फर्जी है या नहीं, मामला सिविल कोर्ट में है। बिना फर्जी साबित हुए आपराधिक केस करना न्यायिक प्रक्रिया के दुरूपयोग की मिसाल है। कोर्ट ने कहा सिविल विवाद को अपराध का कलर दिया गया। दोनों पक्ष जिला कचहरी में वकील हैं।
धोखा हुआ या नहीं यह तय ही नहीं हुआ और दर्ज प्राथमिकी पर पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी। कोर्ट ने संज्ञान लेकर सम्मन भी जारी कर दिया है। जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने अखिलेश कुमार गुप्ता व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर अपराध के आरोप लगाये। जब कि अपराध हुआ या नहीं सिविल कोर्ट द्वारा तय किया जाना है और वकीलों ने कानूनी लड़ाई शुरू कर दी। न्यायिक प्रक्रिया का जमकर दुरूपयोग किया।जिसे कोर्ट ने रद कर दिया है।