इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिर्जापुर के जिलाधिकारी और विंध्याचल मंडल के आयुक्त की ओर से पारित आदेशों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने प्रशासन को मामले में विधि के अनुसार नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिर्जापुर के जिलाधिकारी और विंध्याचल मंडल के आयुक्त की ओर से पारित आदेशों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने प्रशासन को मामले में विधि के अनुसार नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने एक प्रा. लिमिटेड कंपनी की ओर से दायर याचिका पर दिया।
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याचिका के अनुसार मिर्जापुर के जिलाधिकारी ने 27 नवंबर 2025 को कंपनी को कथित नियम उल्लंघन के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। इसके बावजूद निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही जिलाधिकारी ने कंपनी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया।
कंपनी ने इस आदेश को विंध्याचल मंडल के आयुक्त के समक्ष चुनौती दी। लेकिन अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद कंपनी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने कहा कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। क्योंकि संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया।