वहीं, सरकारी अधिवक्ता ने आदेश का समर्थन किया। कहा कि सप्लायर की खरीद संदिग्ध थी। इसलिए याची आईटीसी का लाभ पाने का हकदार नहीं है। कोर्ट ने पाया कि माल की वास्तविक आवाजाही और भुगतान सिद्ध है। धोखाधड़ी या तथ्य छिपाने का कोई निष्कर्ष रिकॉर्ड पर नहीं है। विभाग ने केवल खुफिया रिपोर्ट पर भरोसा कर कार्रवाई की जबकि उसे पहले सत्यापित करना चाहिए था। साथ ही करदाता को रिपोर्ट की प्रति भी उपलब्ध नहीं कराई गई। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए जीएसटी विभाग के 12 जनवरी 2022 और 20 दिसंबर 2022 के आदेश को रद्द कर दिया।
क्या है जीएसटी की धारा 74
कोई व्यापारी धोखाधड़ी करे, गलत जानकारी दे या तथ्य छिपाकर टैक्स बचाने की कोशिश करे, तब धारा-74 लागू होती है। इस स्थिति में विभाग टैक्स के साथ-साथ ब्याज और भारी जुर्माना भी वसूल सकता है।