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High Court : जीएसटी का मकसद व्यापार में सुगमता लाना, व्यापारियाें का उत्पीड़न नहीं

Sun, 14 Sep 2025 02:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जीएसटी का उद्देश्य व्यापार में सुगमता लाना है, व्यापारियों को सताना नहीं है। फिर भी अधिकारी धारा-74 की आड़ में व्यापारियों का उत्पीड़न कर रहे हैं।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जीएसटी का उद्देश्य व्यापार में सुगमता लाना है, व्यापारियों को सताना नहीं है। फिर भी अधिकारी धारा-74 की आड़ में व्यापारियों का उत्पीड़न कर रहे हैं। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की अदालत ने दवा निर्माता कंपनी मेसर्स सेफकॉन लाइफसाइंस प्राइवेट लिमिटेड की याचिका स्वीकार करते हुए जीएसटी विभाग की ओर से पारित आदेशों को रद्द कर दिया है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत बयान या तथ्य छिपाने का ठोस निष्कर्ष न निकले, तब तक धारा-74 यूपी जीएसटी अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती। याची कंपनी दवा उत्पादों के निर्माण व थोक व्यापार से जुड़ी है। उसने अप्रैल 2021 में महाराष्ट्र स्थित यूनिमैक्स फार्मा केम से खरीदारी की थी। इस सौदे के लिए जीएसटी चालान, ई-वे बिल, परिवहन दस्तावेज और बैंकिंग चैनल से भुगतान प्रस्तुत किया गया। आपूर्तिकर्ता ने जीएसटीआर-एक और तीन बी दाखिल कर जीएसटी भी जमा किया।

इसके बावजूद उपायुक्त वाणिज्य कर आगरा ने 12 जनवरी 2022 को आदेश पारित कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को अस्वीकार कर दिया। कहा, सप्लायर का पंजीकरण रद्द हो चुका था। अपील में भी 20 दिसंबर 2022 को आदेश बरकरार रखा गया। इन आदेशों के खिलाफ याची फर्म ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि वास्तविक माल की आवाजाही, बैंकिंग चैनल से भुगतान और समय पर रिटर्न दाखिल होने के बावजूद कर लाभ से वंचित किया गया। उन्होंने 13 दिसंबर 2023 के केंद्र सरकार के परिपत्र और खुर्जा स्क्रैप ट्रेडिंग कंपनी मामले का हवाला देते हुए कहा कि केवल संदेह के आधार पर धारा-74 लागू नहीं की जा सकती।

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वहीं, सरकारी अधिवक्ता ने आदेश का समर्थन किया। कहा कि सप्लायर की खरीद संदिग्ध थी। इसलिए याची आईटीसी का लाभ पाने का हकदार नहीं है। कोर्ट ने पाया कि माल की वास्तविक आवाजाही और भुगतान सिद्ध है। धोखाधड़ी या तथ्य छिपाने का कोई निष्कर्ष रिकॉर्ड पर नहीं है। विभाग ने केवल खुफिया रिपोर्ट पर भरोसा कर कार्रवाई की जबकि उसे पहले सत्यापित करना चाहिए था। साथ ही करदाता को रिपोर्ट की प्रति भी उपलब्ध नहीं कराई गई। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए जीएसटी विभाग के 12 जनवरी 2022 और 20 दिसंबर 2022 के आदेश को रद्द कर दिया।

क्या है जीएसटी की धारा 74

कोई व्यापारी धोखाधड़ी करे, गलत जानकारी दे या तथ्य छिपाकर टैक्स बचाने की कोशिश करे, तब धारा-74 लागू होती है। इस स्थिति में विभाग टैक्स के साथ-साथ ब्याज और भारी जुर्माना भी वसूल सकता है।
 
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