रामपुर के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में सपा नेता आजम खान, उनकी पत्नी तंजीम फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम खान की ओर से दाखिल याचिका पर मंगलवार को अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलें पेश कीं। दावा किया कि आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम के जन्म प्रमाण पत्रों में संशोधन नहीं, फर्जीवाड़ा हुआ हैै। 2006 से 2015 के बीच जारी तीन प्रमाण पत्रों में अकिंत अलग-अलग जन्मतिथि और जन्मस्थान फर्जीवाड़े की कहानी खुद ब खुद बयां कर रहे। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की अदालत कर रही है। अगली सुनवाई छह मई को होगी।
पिछले सोमवार को आजम खान के कुनबे का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और इमरान उल्ला ने कहा था कि जन्म प्रमाण पत्र में कानूनन संशोधन किया गया है। आरोप बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित है। मंगलवार को राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता पीसी श्रीवास्तव, अपर शासकीय अधिवक्ता जेके उपाध्याय और वादी भाजपा नेता आकाश सक्सेना के वकील शरद शर्मा ने कपिल सिब्बल की दलीलों को सिरे से नकार दिया।
दावा किया कि आजम के बेटे अब्दुल्ला आजम के पक्ष में तीन जन्म प्रमाण पत्र जारी है। इसमें 2006 और 2012 में रामपुर नगर पालिका से जारी प्रमाणपत्र में अब्दुल्ला का जन्म वर्ष 1993 और जन्म स्थान रामपुर दर्शाया गया है। वहीं, लखनऊ से जनवरी 2015 में जारी तीसरे जन्म प्रमाण पत्र में जन्म वर्ष 1990 और जन्म स्थान लखनऊ अकिंत है।
दस्तावेजी साक्ष्य से स्पष्ट हो रहा है कि यह फर्जीवाड़ा मंत्री रहे आजम खान ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके किया है। इनका प्रयोग बेटे अब्दुल्ला को 2017 में चुनाव लड़ाने के लिए किया गया था। उस वक्त उनकी उम्र महज 24 वर्ष थी। फर्जी प्रमाण पत्र की वजह से वह चुनाव लड़ने के योग्य हो गए। भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने दर्ज मामले में आजम खान के पूरे कुनबे को रामपुर की जिला अदालत ने दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई थी। इस मामले में आजम खान का पूरा कुनबा जेल की सलाखों के पीछे हैं।