इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संपत्ति का पंजीकरण केवल पति के नाम पर है, पत्नी उसमें अपने वित्तीय योगदान का प्रमाण देने में विफल रहती है तो वह उसकी सह-स्वामी नहीं मानी जा सकती।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संपत्ति का पंजीकरण केवल पति के नाम पर है, पत्नी उसमें अपने वित्तीय योगदान का प्रमाण देने में विफल रहती है तो वह उसकी सह-स्वामी नहीं मानी जा सकती। इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने सोनू सिरोही की अपील खारिज कर दी। गौतमबुद्ध नगर के नोएडा स्थित एटीएस ग्रीन विलेज में पुष्पेंद्र सिंह सिरोही ने जून 2006 में नोएडा प्राधिकरण और बिल्डर के साथ त्रिपक्षीय समझौते के तहत फ्लैट खरीदा था।
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पत्नी सोनू सिरोही से विवाद होने पर उन्होंने उससे किराया वसूलने और रहने के लिए दिए गए लाइसेंस को नवंबर 2009 में रद्द कर दिया। फ्लैट खाली करने का नोटिस भी दे दिया। इसके बाद फ्लैट 95 लाख रुपये में पूनम अग्रवाल को बेच दिया। ट्रायल कोर्ट से राहत न मिलने पर पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। पत्नी की ओर से दलील दी गई कि फ्लैट ‘स्त्रीधन’ और गहनों को बेचकर पैसों से खरीदा गया था। इसलिए वह उसकी सह-स्वामी है।
ऐसे में पति फ्लैट को बेच नहीं सकता। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि फ्लैट की लीज डीड और बैंक लोन के दस्तावेज केवल पति के नाम पर थे। दस्तावेज से फ्लैट में पत्नी का कोई वित्तीय योगदान साबित नहीं होता। कोर्ट ने माना कि मई 2011 से फ्लैट पर पत्नी का कब्जा पूरी तरह अवैध है। क्योंकि, फ्लैट का संभावित किराया 60,000 रुपये प्रतिमाह था। इसलिए कोर्ट ने आदेश दिया कि पत्नी मई 2011 से फ्लैट खाली करने की तिथि तक इसी दर से हर्जाना दे।