इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग अपनी मर्जी शादी करता है तो अपराध नहीं है। ऐसे मामलों में पुलिस को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जेजे मुनीर व न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने भदोही निवासी जोड़े की याचिका पर अपहरण से संबंधित एफआईआर रद्द कर दी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग अपनी मर्जी शादी करता है तो अपराध नहीं है। ऐसे मामलों में पुलिस को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जेजे मुनीर व न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने भदोही निवासी जोड़े की याचिका पर अपहरण से संबंधित एफआईआर रद्द कर दी। साथ ही पुलिस और युवती के पिता पर जुर्माना लगाया है।
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जोड़े ने अपहरण के आरोप में सुरियावां थाने में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। उनका कहना था कि दोनों बालिग हैं और प्रेम संबंध में थे। 18 फरवरी को प्रयागराज में आर्य वैदिक सभा में शादी की थी। इसकी जानकारी मिलने पर परिजनों ने विरोध किया था और जान से मारने की धमकी दी थी। इसके बाद दोनों ने सुरक्षा की गुहार लगाई थी।
सुनवाई के दौरान युवती ने कहा कि उसने मर्जी से शादी की है। वह पति के साथ ही रहना चाहती है। इस पर कोर्ट ने माना कि प्रलोभन या अपहरण का प्रश्न नहीं उठता। वहीं, कोर्ट ने एफआईआर रद्द कर पुलिस अधीक्षक(एसपी) और सुरियावां थाना प्रभारी पर संयुक्त रूप से एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही युवती के पिता पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। निर्देश दिया कि यह राशि युवती को अदा की जाए।