इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मीटर रीडिंग और बिजली बिल वितरण का ठेका एक निजी कंपनी को न देने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि यह जनहित याचिका दुर्भावना पूर्ण उद्देश्य के लिए दाखिल हुई है, लिहाजा पोषणीय नहीं है। यह आदेश मुख्य न्यायधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास बुधवार की अदालत ने कानपुर नगर के याची आकाश कुमार की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है।
याची ने अधीक्षण अभियंता वाणिज्य को निर्देश देने की मांग की थी कि टीडीएस प्रबन्धन कंपनी को डोर टू डोर मीटर रीडिंग व बिल वितरण कार्य का ठेका न दिया जाए। याची की ओर से कंपनी पर कई आरोप लगाए गए थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि यह याचिका याची के एक मजूदर मित्र ने बतौर पैरोकार दाखिल की थी। उसने हलफनामा व याचिका पर अंगूठा निशान लगाया था।
कोर्ट ने संदेह जताते हुए अधिवक्ता से याचिका में दाखिल दस्तावेजों के श्रोत की जानकारी मांगी, तो वह जवाब नहीं दे सके। न ही याची की विधिक हैसियत बता सके। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह याचिका प्रतिद्वंदी ठेकेदार द्वारा दाखिल कराई गई है। खफा कोर्ट ने फटकार लगाते हुए जनहित याचिका खारिज कर दी। साथ ही चेतावनी दिया कि भविष्य में इस तरह की याचिका दाखिल करने से पहले सावधान रहें।