इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तथ्यों को छिपाकर जनहित याचिका दायर करने पर याची पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तथ्यों को छिपाकर जनहित याचिका दायर करने पर याची पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ दिया है। प्रयागराज निवासी याचिकाकर्ता फिरोज अहमद ने मौजा-गोविंदपुर, तहसील-सदर स्थित आराजी नंबर 379 पर अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की थी। उसका दावा था कि उक्त जमीन खलिहान के रूप में दर्ज है।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान प्रयागराज विकास प्राधिकरण(पीडीए) और निजी प्रतिवादियों के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि यह निजी विवाद का मामला है, जनहित का नहीं। प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई हुई है। याचिकाकर्ता ने भी सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के समक्ष एक दीवानी मुकदमा दायर कर रखा है, जो लंबित है। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद एक-दूसरे पर एफआईआर दर्ज होने की बात छुपाने पर नाराजगी जताई और याचिका खारिज कर दी।