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High Court : संयुक्त बैंक खाते के चेक पर जिसका हस्ताक्षर नहीं उसे नहीं ठहराया जा सकता दोषी

Wed, 13 May 2026 11:04 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई चेक संयुक्त बैंक खाते से जारी किया गया है तो केवल उसी व्यक्ति को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है जिसने उस चेक पर हस्ताक्षर किए हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई चेक संयुक्त बैंक खाते से जारी किया गया है तो केवल उसी व्यक्ति को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है जिसने उस चेक पर हस्ताक्षर किए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने गाजियाबाद की मधु सिंह की याचिका पर दिया है।

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यह मामला वर्ष 2006 में गाजियाबाद के कवि नगर थाने में दर्ज एक शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता हरि ओम पाठक ने राहुल और मधु सिंह (याची) के खिलाफ धोखाधड़ी और चेक बाउंस के आरोप लगाए थे। शिकायत के अनुसार राहुल ने व्यापारिक उद्देश्य के लिए ऋण लिया था और उसके बदले में दो चेक जारी किए थे। खाते में पर्याप्त राशि न होने की वजह से बाउंस हो गए। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में याची को भी तलब किया था। इस फैसल को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याची के वकील ने दलील दी कि चेक केवल राहुल की ओर से हस्ताक्षरित थे। याची केवल एक संयुक्त खाताधारक थीं।

उनका इस लेनदेन या चेक जारी करने में कोई भूमिका नहीं है। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चेक बाउंस के अपराध के लिए चेक पर हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिक दायित्व का सिद्धांत केवल कंपनियों और साझेदारी फर्मों पर लागू होता है, लोगों पर नहीं।
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याची ने चेक पर हस्ताक्षर नहीं किए थे और न ही उनके खिलाफ कोई विशिष्ट आपराधिक भूमिका साबित हुई थी। इस आधार पर कोर्ट ने गाजियाबाद की विशेष अदालत में लंबित कार्यवाही को रद्द कर दिया। हालांकि, आरोपी राहुल के खिलाफ मामला नियमानुसार जारी रखने का निर्देश दिया है।

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