इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल के हजरतनगर गढ़ी क्षेत्र में मुहर्रम के दौरान ताजिया और अलम जुलूस को सिरसी-बिलारी मुख्य मार्ग से निकालने की अनुमति नहीं दी। कोर्ट ने कहा कि किसी धार्मिक जुलूस को किसी विशेष मार्ग से निकालना मौलिक अधिकार का हिस्सा नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल के हजरतनगर गढ़ी क्षेत्र में मुहर्रम के दौरान ताजिया और अलम जुलूस को सिरसी-बिलारी मुख्य मार्ग से निकालने की अनुमति नहीं दी। कोर्ट ने कहा कि किसी धार्मिक जुलूस को किसी विशेष मार्ग से निकालना मौलिक अधिकार का हिस्सा नहीं है। ऐसे मामलों में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति को प्राथमिकता दी जाएगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर, न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने शरीफ अहमद और अन्य की जनहित याचिका पर दिया है। याचियों का तर्क था कि 1952 से 2022 तक ताजिया जुलूस एक पारंपरिक मार्ग से निकलता था। 2022 में रेलवे लाइन के विद्युतीकरण के बाद हादसे और रेलवे की ओर से रास्ता बंद किए जाने के कारण पुराना मार्ग उपयोग में नहीं रहा। इसके चलते प्रशासन से नए मार्ग की अनुमति मांगी गई थी।
प्रशासन ने अदालत को बताया कि 2023 में समुदाय और प्रशासन के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत जुलूस एक निर्धारित मार्ग से सरकारी ट्यूबवेल तक जाएगा। वहीं, धार्मिक रस्में पूरी की जाएंगी। उसके बाद अलम को अलग कर वापस ले जाया जाएगा। प्रशासन ने यह भी कहा कि प्रस्तावित नया मार्ग सिरसी-बिलारी मुख्य मार्ग से होकर जाता है। इसका अन्य समुदायों की ओर से विरोध किया गया है।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धर्म का पालन करने का अधिकार और उसे किसी विशेष तरीके या विशेष मार्ग पर करने का दावा अलग-अलग बातें हैं। यदि प्रशासन ने शांति व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए किसी नए मार्ग की अनुमति नहीं दी है तो उसे अवैध नहीं कहा जा सकता।