इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण के लिए मकान और दुकान ध्वस्तीकरण से जुड़े मामले में अवमानना याचिका निस्तारित कर दी। साथ ही वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के सचिव को याचियों के जवाब पर दो सप्ताह में अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने गुल महक जोहरा व एक अन्य की अवमानना याचिका पर दिया। याचियों का कहना था कि उनके मकानों, दुकानों को बिना अधिग्रहण और मुआवजा दिए ध्वस्त किए जाने की आशंका है। इस संबंध में उन्होंने पहले 2025 में रिट याचिका दाखिल की थी।
हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दिया गया था कि प्रभावित संपत्तियों का अधिग्रहण आपसी सहमति, वैधानिक प्रक्रिया या भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत किए बिना कब्जा नहीं लिया जाएगा और न ही निर्माण गिराए जाएंगे।
सुनवाई के दौरान वाराणसी के डीएम का व्यक्तिगत हलफनामा भी कोर्ट में दाखिल किया गया। याचियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि वाराणसी विकास प्राधिकरण ने 17 अप्रैल 2026 को नोटिस जारी किया था, जिसका जवाब 12 मई 2026 को दे दिया गया है।
राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि वाराणसी विकास प्राधिकरण मूल रिट याचिका में पक्षकार नहीं था। उसके विरुद्ध कोई विशेष आदेश भी पारित नहीं हुआ था। ऐसे में अवमानना का मामला नहीं बनता। कोर्ट ने कहा कि याचियों ने वीडीए के नोटिस का जवाब दे दिया है। इसलिए प्राधिकरण नियमानुसार उस पर विचार कर अंतिम निर्णय ले।