इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए रवि तिवारी व दो अन्य याचिकाकर्ताओं को अवैध हिरासत से तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी और रिमांड की प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं अपनाई गई। इसलिए विवादित रिमांड आदेश निरस्त किए जाते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने दिया है।
ललितपुर निवासी याचियों ने अवैध हिरासत को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। अधिवक्ता ने दलील दी कि याचियों को भोपाल से गिरफ्तार कर बिना ट्रांजिट रिमांड लिए सीधे ललितपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। साथ ही गिरफ्तारी के आधार भी उपलब्ध नहीं कराए गए। यह सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और पूर्व आदेशों के विपरीत है।
र्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि गिरफ्तारी वारंट निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं था। ट्रांजिट रिमांड न लेना प्रक्रिया की गंभीर चूक है। इस आधार पर जारी किए गए रिमांड आदेशों को रद्द कर दिया। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए तीनों को तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए। हालांकि, राज्य को कानून के अनुसार नई कार्यवाही शुरू करने की छूट भी दी है।