साथ ही कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार पहले की 2015 वाली गाइडलाइन तो लागू कर चुकी है। लेकिन, 2024 की नई गाइडलाइन को लागू न करना अन्याय है। राज्य सरकार इस मामले में चयनात्मक रवैया नहीं अपना सकती है।
कोर्ट ने कहा कि भले ही जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया है। लेकिन हाईटेंशन लाइन गुजरने के बाद जमीन के उपयोग पर कई स्थायी प्रतिबंध लग जाते हैं। जिससे उसकी कीमत और उपयोगिता दोनों घट जाती हैं। ऐसे में प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देना अनिवार्य है।
इसके साथ ही कोर्ट ने 10 मार्च 2026 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें किसानों का दावा खारिज किया गया था। वहीं अधिकारियों को 14 जून 2024 की गाइडलाइन के अनुसार मुआवजा तय कर चार सप्ताह के भीतर किसानों को भुगतान करने का आदेश दिया है।