इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम विकास अधिकारी प्रेम कुमार के निलंबन से जुड़े मामले में विभागीय कार्यवाही का मूल रिकॉर्ड कोर्ट में पेश नहीं करने पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) बागपत को सहायक जिला विकास अधिकारी की 7 नवंबर 2025 को उपस्थिति सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकल पीठ ने दिया है।
विकास खण्ड बड़ौत में कार्यरत रहे ग्राम विकास अधिकारी प्रेम कुमार के खिलाफ ग्राम प्रधान गूंगाखेड़ी ने जिलाधिकारी से अनियमितता की शिकायत की थी। इसपर प्रेम कुमार का दूसरी ग्राम पंचायत में स्थानांतरण हो गया। वहीं, जिला विकास अधिकारी बागपत ने प्रेम कुमार को निलंबित कर विभागीय जांच बैठा दी। इस विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला विकास अधिकारी बागपत ने प्रेम कुमार को वर्ष 2025-26 में मिलने वाली वेतन वृद्धि पर स्थाई रोक लगा दिया।
जिला विकास अधिकारी के इस आदेश को प्रेम कुमार ने हाईकोट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता प्रदीप कुमार सिंह ने दलील दी कि प्रधान ने अपनी शिकायत वापस ले ली है। इसके बाद भी उसी शिकायत पर जांच कराई गई और याची को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना वेतन वृद्धि रोकने का आदेश पारित किया गया। यह नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन है।
कोर्ट ने 26 मई 2025 को विभागीय कार्यवाही का मूल रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया। स्थाई अधिवक्ता के कई बार सूचना दिए जाने के बावजूद मूल रिकॉर्ड कोर्ट में पेश नहीं किया गया। इसके बाद कोर्ट ने 22 सितंबर 2025 को सहायक जिला विकास अधिकारी बागपत को मूल रिकॉर्ड के साथ कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। इसका भी अनुपालन नहीं हुआ। इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बागपत को सहायक जिला विकास अधिकारी बागपत की मूल रिकॉर्ड के साथ न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया है। अगली सुनवाई 07 नवंबर 2025 को होगी।