इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए पांच दिनों तक अवैध हिरासत में रखने के मामले में राज्य सरकार को 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह मुआवजा राशि जांच के उपरांत दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों से तीन माह में वसूल की जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि याची किसी अन्य आपराधिक मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने दिया।
प्रयागराज के मेजा थाना निवासी याची कमलेश कुमार को 15 अगस्त को उनके मेडिकल स्टोर से पुलिस ने उठाया था। इसके बाद उन्हें 19 अगस्त को अदालत के समक्ष पेश किया गया और न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। सुनवाई के दौरान डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस की ओर से प्रस्तुत हलफनामे और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यह बात सामने आई कि याची को 15 अगस्त से ही पुलिस हिरासत में रखा गया था। इस अवैध हिरासत के चलते संबंधित थाना प्रभारी और जांच अधिकारी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस विवेक चंद्र यादव की सत्यनिष्ठा और बिना किसी टालमटोल के पुलिस की गलती को स्वीकार करने के साहस की सराहना की। पीठ ने उम्मीद जताई कि पुलिस प्रशासन भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सुधारात्मक कदम उठाएगा, ताकि जांच प्रक्रिया पूरी करने के साथ-साथ नागरिकों के सांविधानिक अधिकारों की भी पूरी तरह रक्षा की जा सके।