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हाईकोर्ट : कासगंज में पुलिस हिरासत में अल्ताफ की मौत के मामले में एम्स में पोस्टमार्टम कराने का आदेश

Fri, 11 Feb 2022 07:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

चांद मिया ने याचिका में अपने बेटे की हिरासत में मौत के मामले में सीबीआई जांच और दूसरी बार पोस्टमार्टम किए जाने की मांग है। मामले में कोर्ट लगातार तीन दिनों से सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस मामले में न्यायिक जांच के साथ-साथ मजिस्ट्रियल जांच भी चल रही है।
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कासगंज अल्ताफ मौत प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कासगंज पुलिस हिरासत मौत में अल्ताफ ही हुई मौत के मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के डॉक्टरों की एक टीम को नए सिरे से पोस्टमार्टम करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ ने चांदमियां (अल्ताफ के पिता) की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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चांद मिया ने याचिका में अपने बेटे की हिरासत में मौत के मामले में सीबीआई जांच और दूसरी बार पोस्टमार्टम किए जाने की मांग है। मामले में कोर्ट लगातार तीन दिनों से सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस मामले में न्यायिक जांच के साथ-साथ मजिस्ट्रियल जांच भी चल रही है।



न्यायिक जांच के संबंध में अदालत के समक्ष कहा गया कि आज तक 36 गवाहों में से सात से पूछताछ की जा चुकी है और शेष गवाहों में से दो से आज पूछताछ की जानी है। कोर्ट ने एसपी कासगंज को निर्देश दिया है कि वह मृतक की लाश कब्र से बाहर कनकलवा कर सील कर दिल्ली एम्स में भेजें। एम्स चिकित्सकों की टीम द्वारा नए सिरे शव का पोस्टमार्टम किया जाए।

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दूसरे प्रदेश में पोस्टमार्टम कराने का किया था आग्रह

पोस्टमार्टम के दौरान शव की सील खोलने, पोस्टमार्टम होने और दुबारा सीलबंद करने की हाई रेजोल्यूशन वाले कैमरे से वीडियोग्राफी कराई जाए। याची का तर्क है कि अल्ताफ की मौत पुलिस हिरासत में हुई है। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया है। इसलिए पुलिस की पहुंच से दूर प्रदेश के बाहर पोस्टमार्टम कराया जाए।
 

 
 
कोर्ट ने पोस्टमार्टम की तीन प्रति तैयार कर वीडियो फुटेज, फोटोग्राफ, न्यायिक जांच व मजिस्ट्रेटी जांच को सौंपने का निर्देश दिया है और कहा है कि यह कार्रवाई 10 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाए।



इसके अलावा मामले में न्यायिक अधिकारियों को कार्यवाही में तेजी लाने और मजिस्ट्रेटी जांच को चार हफ्ते की अवधि के भीतर पूरी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने चार सप्ताह के बाद सुनवाई की तारीख निर्धारित की है।
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