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हाईकोर्ट : डीआईजी को मजिस्ट्रेट के आदेश के विरुद्ध आदेश पारित करने का अधिकार नहीं

Mon, 10 Jan 2022 09:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज

सार

याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची ने सीआरपीkसी की धारा 156(3) के तहत अर्जी दी, जिसे स्वीकारते हुए मजिस्ट्रेट ने थानाध्यक्ष कोतवाली कानपुर नगर को एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया।
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अदालत - फोटो : Social Media
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि था नाध्यक्ष को केस दर्ज कर विवेचना करने के मजिस्ट्रेट के आदेश के विपरीत डीआईजी द्वारा विवेचना दूसरे थाने में स्थानांतरित करना विधिविरुद्ध है। कोर्ट ने डीआईजी कानपुर नगर के आदेश को रद्द कर दिया है और नए सिरे से केस की विवेचना विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के अनुसार कोतवाली कानपुर नगर में स्थानांतरित करने का आदेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार एवं न्यायमूर्ति एसपी सिंह की खंडपीठ ने अमित सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

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याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची ने सीआरपीkसी की धारा 156(3) के तहत अर्जी दी, जिसे स्वीकारते हुए मजिस्ट्रेट ने थानाध्यक्ष कोतवाली कानपुर नगर को एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया। इससे पहले कल्याणपुर थाने में याची के खिलाफ स्वयं को भूस्वामी बताते हुए पावर ऑफ अटार्नी के माध्यम से धोखाधड़ी व षड़यंत्र कर जमीन बेचने के आरोप में एफआईआर दर्ज थी। जिसमें पुलिस ने दो अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है और याची सहित शेष के खिलाफ विवेचना जारी है।

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डीआईजी को मजिस्ट्रेट के आदेश के विपरीत आदेश देने का अधिकार नहीं
डीआईजी ने कोतवाली में याची की अर्जी पर मजिस्ट्रेट के आदेश से दर्ज केस की विवेचना कल्याणपुर थाने में स्थानांतरित कर दी। मामले में यह कहते हुए चुनौती दी गई कि विवादित जमीन कोतवाली क्षेत्र में है। याची के केस की विवेचना का आदेश मजिस्ट्रेट ने थानाध्यक्ष को दिया है। डीआईजी ने विवेचना स्थानांतरित कर मजिस्ट्रेट के आदेश पर अपील सुनने जैसा काम किया है। उन्हें ऐसा न कर मजिस्ट्रेट की अदालत में आदेश संशोधित करने की अर्जी देनी चाहिए थी। डीआईजी को मजिस्ट्रेट के आदेश के विपरीत आदेश देने का अधिकार नहीं है।
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