हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के न्यायिक कार्य से विरत रहने के चलते कोई भी वकील उपस्थित नहीं हुआ। इसके चलते न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए 20 नवंबर 2024 की तिथि नियत की है। इससे पहले न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की अदालत ने प्रकाश कुमार गुप्ता की जमानत अर्जी मामले में अधिकारियों को तलब किया था।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में सोमवार को प्रमुख सचिव स्वास्थ्य उप्र और वाराणसी स्थित कबीर चौरा अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. कुन्दन कुमार पटेल न्यायालय में पेश हुए। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के न्यायिक कार्य से विरत रहने के चलते कोई भी वकील उपस्थित नहीं हुआ। इसके चलते न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए 20 नवंबर 2024 की तिथि नियत की है। इससे पहले न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की अदालत ने प्रकाश कुमार गुप्ता की जमानत अर्जी मामले में अधिकारियों को तलब किया था।
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दरअसल, बलिया के थाना सहतवार में प्रकाश कुमार गुप्ता पर पॉक्सो सहित अन्य मामलों में मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि 13 वर्षीय बालिका को बहला-फुसला कर भगा ले गया और दुष्कर्म किया। वह 20 फरवरी 2024 से जेल में बंद है। उसने हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी दाखिल कर गुहार लगाई।
ऑसिफिकेशन टेस्ट में पीड़िता की आयु 19 वर्ष पाए जाने पर न्यायालय ने जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। इस दौरान न्यायालय ने पाया कि बलिया जिले में कोई भी रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण पीड़िता को उम्र निर्धारण की जांच के लिए परेशानी उठानी पड़ी। जांच के लिए पीड़िता को वाराणसी कबीर चौरा अस्पताल ले जाया गया, जहां रेडियोलॉजिस्ट ने जांच करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद पीड़िता की आजमगढ़ के अतरौलिया, सीएचसी में जांच की गई।
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न्यायालय ने कहा कि बार-बार देखा है कि राज्य के कई जिलों में रेडियोलॉजिस्ट तैनात नहीं हैं। इससे पीड़ितों को उनकी मेडिको-लीगल रेडियोलॉजिकल जांच में उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। न्यायालय ने विभिन्न जिलों में रेडियोलॉजिस्ट की अनुपलब्धता को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि यह गंभीर स्थिति है। मामले में न्यायालय ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य उत्तर प्रदेश और वाराणसी के कबीर चौरा अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था।