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High Court News : कोर्ट कार्यवाही की रिकॉर्डिंग करने पर अधिवक्ता को नोटिस, 18 दिसंबर को होगी सुनवाई

Wed, 03 Dec 2025 03:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की कार्यवाही की गुप्त रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग करना एक अधिवक्ता को भारी पड़ गया। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की अदालत ने इसे सीधे-सीधे न्यायिक कामकाज में दखल करार देते हुए उसे नोटिस जारी किया है।
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अधिवक्ता। - फोटो : ANI
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की कार्यवाही की गुप्त रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग करना एक अधिवक्ता को भारी पड़ गया। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की अदालत ने इसे सीधे-सीधे न्यायिक कामकाज में दखल करार देते हुए उसे नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि आखिर क्यों न उसके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। मामले की सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।

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मामला रावेंद्र कुमार धोबी की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान सामने आया। चित्रकूट के मोहनरवा निवासी अधिवक्ता चुपके से कार्यवाही को रिकॉर्ड कर रहे थे। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे गंभीर आपराधिक अवमानना माना। कहा कि बिना अनुमति कोर्ट के भीतर वीडियोग्राफी करना न्यायिक प्रक्रिया में व्यवधान डालने जैसा है। कोर्ट ने इसे न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप माना और नोटिस जारी कर सफाई मांगी है।

थानों के अंशकालिक सफाईकर्मी भी न्यूनतम वेतन के हकदार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस थानों में कार्यरत अस्थायी अंशकालिक सफाई कर्मचारी न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के तहत वेतन पाने के हकदार हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकल पीठ ने ललितपुर निवासी गोविंददास व अन्य की याचिका पर दिया। याची ललितपुर के मदनपुर और बरार नाराहट पुलिस थाने में 1200 रुपये मानदेय पर सफाई कर्मचारी के तौर पर कार्यरत हैं। कोर्ट ने डीजीपी,ललितपुर के एसपी, थाना प्रभारी को निर्देशित किया है कि याचियों को नियुक्ति की तिथि से बकाया राशि सहित न्यूनतम मजदूरी दी जाए। 
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कैंट पुलिस पर परिवार को अवैध रूप से पकड़कर रखने का आरोप, आज करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के पुलिस कमिश्नर और थाना प्रभारी कैंट को आदेश दिया है कि कथित अवैध रूप से निरुद्ध याची दीपक गुप्ता, उनकी मां कस्तूरी देवी और भाई गौरव गुप्ता को तीन दिसंबर को दोपहर दो बजे अदालत में पेश करें। कोर्ट ने राज्य सरकार को भी जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश दीपक गुप्ता, उनकी पत्नी शालिनी गुप्ता व अन्य की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप है कि कैंट थाना पुलिस ने 23 नवंबर 2025 से दीपक, उनकी मां और भाई को थाने में बंद कर रखा है। न तो उनका चालान किया गया और न ही किसी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने अब तक उनकी स्थिति और गिरफ्तारी से जुड़ी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए तीनों को पेश करने का निर्देश दिया है।
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