गन्ना किसानों का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने पर हाईकोर्ट ने एक बार फिर प्रदेश सरकार को आड़े हाथ लेते हुए पूछा है कि सरकार ने मिल मालिकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ एफआईआर दर्ज कर लेना और आरसी जारी कर देना ही पर्याप्त नहीं है। दोषी लोगों की गिरफ्तारी तथा उनकी संपत्ति जब्त करने जैसी कार्रवाई भी की जानी चाहिए थी। राष्ट्रीय किसान मजदूर यूनियन की जनहित याचिका पर सुनवाई रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने समयाभाव के कारण सुनवाई सोमवार के लिए टालते हुए प्रदेश सरकार को पूरी स्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया है।
याची संस्था के संयोजक वीएम सिंह ने सहकारी चीनी मिलों का मामला उठाते हुए बताया कि सहकारी मिलों पर 151 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है, उन्होंने 290 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। शेष राशि केंद्र सरकार से पैकेज मिलने पर की भुगतान की जाएगी। सरकार चाहे तो किसानों का भुगतान कर सकती है। केंद्र से रकम मिलने पर उसकी भरपाई हो जाएगी। सहकारी मिलों के वकील अजय भनोट ने कहा कि सहकारी मिलों को भी रकम 15 प्रतिशत के ब्याज पर लेनी पड़ती है। मिलें किसानों की हैं, उनकी समिति इनका संचालन करती है। वीएम सिंह ने कहा कि सरकार सिर्फ भुगतान से बचने के लिए कह रही है कि मिलें उसकी नहीं हैं।
मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने बताया कि प्राइवेट मिलों पर अभी 4807 करोड़ रुपये बकाया है। उन्होंने 2650 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। 1167 करोड़ रुपये केंद्र सरकार से मिलने पर किसानों का 3650 करोड़ रुपये शेष रह जाएगा, जिसके भुगतान पर विचार किया जाएगा। वीएम सिंह का कहना था कि मिलों द्वारा दी गई रकम में से भी 2081 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने दिया है। मिलों ने अपने पास से मुश्किल से 600 करोड़ रुपये से भी कम दिए हैं। उन्होंने कहा कि मिलें किसानों को गुमराह कर रही हैं।
वास्तविकता यह है कि मिलों ने बैंको से काफी ऋण लिया है। जितना भुगतान करना है उससे कहीं ज्यादा रुपये ले लिए हैं फिर भी किसानों को कुछ नहीं दिया। उदाहरण के लिए बजाज सुगर मिल ने 2949.50 करोड़ रुपये का गन्ना पेरा है। इसके एवज में उसने 7111.34 करोड़ रुपये का बैंक से ऋण लिया है। सांभवी मिल ने 1137.3 करोड़ और बिरला ने 1510.49 करोड़ रुपये का लोन लिया है। मिलें लगभग दो हजार करोड़ रुपये का लोन बैंकों से ले चुकी हैं। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा कि भुगतान न करने वाले मिल संचालकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई है। मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कहा कि वह वीएम सिंह के हलफनामे का अध्ययन करने के बाद सोमवार को इस मसले पर जवाब देंगे।