इलाहाबाद हाईकोर्ट में मंगलवार को वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद स्थित वजूखाना की एएसआई जांच की मांग याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने याची अधिवक्ता से पूछा कि वजूखाना की एएसआई सर्वे क्यों कराना चाहते हैं? याची अधिवक्ता ने दलील दी कि ज्ञानवापी के धार्मिक चरित्र के निर्धारण के लिए वजूखाना की एएसआई सर्वे जरूरी है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी से काउंटर दाखिल करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत याची राखी सिंह की अपील पर सुनवाई कर रही है। अधिवक्ता सौरभ तिवारी, विकास कुमार व अमिताभ त्रिवेदी ने पक्ष रखा। मामले में याची अधिवक्ता ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई 2022 के अपने आदेश में वजूखाना क्षेत्र को सुरक्षित और संरक्षित करने का आदेश दिया था। इसे सील नहीं किया है। इसलिए इसकी जांच की जा सकती है। विवादित स्थल में शिवलिंग मिला है। इसलिए वजूखाना की एएसआई जांच जरूरी है, ताकि ट्रायल कोर्ट के समक्ष विवादित स्थल के धार्मिक चरित्र का निर्धारण हो सके।
कोर्ट ने कहा कि एएसआई पहले ही ज्ञानवापी परिसर की जांच कर चुकी है। उस रिपोर्ट को देखिए। इसके बाद बताइए कि रिपोर्ट में ऐसा क्या है, जिसके आधार पर वजूखाना की एएसआई जांच कराई जानी चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने एएसआई के वकील से पूछा कि आपकी जांच में क्या मिला है? अधिवक्ता ने कहा कि रिपोर्ट दाखिल की गई है। कोर्ट के आदेश का अनुपालन किया जाएगा। वहीं, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता जहीर असगर को जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट ने चार सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के लिए अगली तिथि 14 अगस्त निर्धारित की है।
इनसेटएएसआई जांच की मांग जिला न्यायालय कर चुका है खारिज
वजूखाना क्षेत्र की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) जांच की मांग जिला न्यायालय खारिज कर चुका है। इस आदेश को राखी सिंह ने पुनरीक्षण याचिका दायर कर चुनौती दी है। उनका कहना कि इस जांच से वादी और प्रतिवादी दोनों पक्षों को लाभ होगा।