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हाईकोर्ट : बंदरों के उत्पात से निपटने की कार्रवाई आंख में धूल झोंकने जैसी, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

Thu, 03 Sep 2026 04:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदरों के उत्पात से निपटने के लिए गठित समितियों की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उनके अध्यक्षों को तलब किया है। कहा है कि समिति का गठन महज आंख में धूल झोंकने के लिए किया गया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदरों के उत्पात से निपटने के लिए गठित समितियों की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उनके अध्यक्षों को तलब किया है। कहा है कि समिति का गठन महज आंख में धूल झोंकने के लिए किया गया है। अब तक बंदरों के उत्पात और आम जनता की परेशानियों पर कोई जमीनी काम नहीं किया गया।

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यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने विनीत शर्मा व अन्य की जनहित याचिका पर की है। कोर्ट ने आदेश पर प्रदेश सरकार ने 15 जुलाई को 13 अधिकारियों की समिति गठित की थी। समिति को याचियों की ओर से सुझाई गई कार्ययोजना पर विचार कर बंदरों की समस्या के समाधान के उपाय बताने थे।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि समिति नियमित अंतराल पर बैठक करें, उसकी कार्यवाही महज कागजों तक सीमित न रहे, बैठकों की प्रगति और कार्यवृत्त पेश किए जाएं। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि समिति की अब तक केवल एक बैठक 21 अगस्त को हुई। इसमें भी चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा गया।
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हैरानी की बात यह सामने आई कि समिति के दोनों संयुक्त अध्यक्ष, प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी बैठक में मौजूद ही नहीं थे। कोर्ट ने पाया कि बैठक का कोई कार्यवृत्त भी तैयार नहीं किया गया। उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर के अलावा बैठक में ठोस कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड नहीं था। इस पर पीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि समिति का गठन महज ‘आंखों में धूल झोंकने’ जैसा साबित हुआ है।

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मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं अधिकारी

ऐसा प्रतीत होता है कि इसका उद्देश्य केवल मामले में स्थगन लेना और वास्तविक रूप से कुछ नहीं करना है। कोर्ट ने कहा कि समिति के सदस्यों का रवैया और प्रदेश सरकार का न्यायालय के आदेशों के प्रति सामान्य दृष्टिकोण स्वीकार्य नहीं है। बंदरों की समस्या करीब 15 महीने से बनी है। इसके बावजूद अधिकारी इसे गंभीरता से लेते नजर नहीं आ रहे हैं।

कोर्ट ने समिति को हर सप्ताह बैठक करने और प्रत्येक बैठक का विधिवत कार्यवृत्त तैयार करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई से पहले समिति को बंदरों की समस्या के समाधान के संबंध में कोई ठोस निर्णय लेकर उसकी जानकारी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आदेश के अनुसार बैठकें नहीं हुईं तो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव, जो समिति के संयुक्त अध्यक्ष हैं, अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होंगे। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को आदेश की जानकारी सभी संबंधित पक्षों को देने का निर्देश दिया गया है। 12 अक्तूबर को सुनवाई होगी।
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