ऐसा प्रतीत होता है कि इसका उद्देश्य केवल मामले में स्थगन लेना और वास्तविक रूप से कुछ नहीं करना है। कोर्ट ने कहा कि समिति के सदस्यों का रवैया और प्रदेश सरकार का न्यायालय के आदेशों के प्रति सामान्य दृष्टिकोण स्वीकार्य नहीं है। बंदरों की समस्या करीब 15 महीने से बनी है। इसके बावजूद अधिकारी इसे गंभीरता से लेते नजर नहीं आ रहे हैं।
कोर्ट ने समिति को हर सप्ताह बैठक करने और प्रत्येक बैठक का विधिवत कार्यवृत्त तैयार करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई से पहले समिति को बंदरों की समस्या के समाधान के संबंध में कोई ठोस निर्णय लेकर उसकी जानकारी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आदेश के अनुसार बैठकें नहीं हुईं तो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव, जो समिति के संयुक्त अध्यक्ष हैं, अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होंगे। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को आदेश की जानकारी सभी संबंधित पक्षों को देने का निर्देश दिया गया है। 12 अक्तूबर को सुनवाई होगी।