प्रतिवादी के अधिवक्ता की दलील
रामगोपाल के अधिवक्ता की दलील दी कि पार्वती के पति रामनारायण ने 1961 में वसीयत की थी। उसके तहत सिर्फ उनके जीवित रहने तक ही संपत्ति पर पार्वती को अधिकार दिया गया था। ऐसे में वह बंटवारे व कब्जे की मांग नहीं कर सकती।
पार्वती के अधिवक्ता की दलील
अधिवक्ता ने दलील दी कि पति की मौत के बाद पत्नी उसके हिस्से की पूर्ण स्वामी है। चकबंदी के दौरान पार्वती का नाम भूमिधरी में दर्ज हो चुका है। चकबंदी के 33 साल बाद रामगोपाल की ओर से पेश की गई वसीयत संदिग्ध है।