प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा कि कॉलोनी के आवंटन के बाद लेआउट प्लान में बदलाव कर प्रकृति परिवर्तित करने का प्राधिकरण को अधिकार नहीं है। यदि किसी को 18 फीट सड़क पर कॉर्नर का प्लाट, जिसके सामने ग्रीन बेल्ट है दिया गया है तो इस ग्रीन बेल्ट को रिहायशी कॉलोनी में विकसित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण को आदेश दिया कि कसिया फिशचुला इस्टेट के नाम से सेक्टर-4 में आवंटित 1022 वर्ग मीटर भूमि की स्थिति में बदलाव न करें और पट्टे की शर्तों के अनुसार उसकी स्थिति को बहाल किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल तथा न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने राकेश अग्रवाल की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
याची का कहना था कि उसे 4 जून 2004 को प्रकाशित विज्ञापन के तहत 22 अप्रैल 2004 को एक हजार वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई। 22 वर्ग मीटर अधिक जमीन पर कब्जा होने के कारण उससे 15 फीसदी अतिरिक्त चार्ज भी लिया गया, जिसमें जमीन की लोकेशन की भी कीमत शामिल थी। यह जमीन 18 मीटर चौड़ी सड़क पर कार्नर की है। सामने ग्रीन बेल्ट है। अथॉरिटी ने लेआउट प्लान में बदलाव करते हुए याची के प्लाट के सामने स्थित ग्रीन बेल्ट को रिहायशी कॉलोनी में तबदील कर दिया, जिसे चुनौती दी गई थी।
उसका कहना था कि ग्रीन बेल्ट की वजह से प्लाट लिया है, जिसकी अलग से कीमत दी है। कोर्ट ने कहा कि आवंटित प्लाट की स्थिति में बदलाव सही नहीं है, ऐसा करना मनमानापूर्ण है। प्राधिकरण को अपने द्वारा घोषित मास्टर प्लान में मनमाने तौर पर बदलाव करते हुए भूमि की स्थिति परिवर्तित करने का अधिकार नहीं है, इसलिए याची के प्लाट की पट्टे की प्रकृति को बहाल किया जाए।