इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कायस्थ पाठशाला (केपी) ट्रस्ट के अध्यक्ष पद के चुनाव में पुनर्गणना विवाद को लेकर डॉ.सुशील सिन्हा की विशेष अपील खारिज कर दी। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने कहा कि एकल पीठ के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। ऐसे में हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता।
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कायस्थ पाठशाला सोसायटी के अध्यक्ष पद के लिए 25 दिसंबर 2023 को मतदान हुआ था, जिसमें प्रारंभिक मतगणना में डॉ.सिन्हा को विजयी घोषित किया गया। बाद में प्रतिद्वंद्वी राघवेंद्र नारायण सिंह की आपत्ति पर एसडीएम के आदेश से पुनर्गणना कराई गई। इसमें 148 वैध मतों की गिनती के बाद राघवेंद्र 77 मतों से विजयी पाए गए और सहायक रजिस्ट्रार ने 28 मार्च 2025 को उन्हें प्रमाणपत्र जारी कर दिया।
डॉ. सिन्हा ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे एकल पीठ ने 15 नवंबर 2025 को खारिज कर दिया। विशेष अपील में उन्होंने प्रतिवादी को पद से हटाने की मांग भी की थी। अदालत ने राज्य और प्रतिवादी के तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि पुनर्गणना वैध थी और चुनाव परिणाम को चुनौती नहीं दी गई। इसलिए राहत नहीं दी जा सकती।