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High Court : विभागीय चूक का दंड कर्मचारी को देना गलत, सहायक अध्यापिका की सेवा समाप्ति का आदेश रद्द

Wed, 28 Jan 2026 05:27 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी विभागों की चूक के लिए कर्मचारी को दंडित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने मुरादाबाद में तैनात रहीं सहायक अध्यापिका अनीता रानी की विशेष अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी विभागों की चूक के लिए कर्मचारी को दंडित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने मुरादाबाद में तैनात रहीं सहायक अध्यापिका अनीता रानी की विशेष अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने एकल न्यायाधीश व मुरादाबाद के बीएसए की ओर से पारित सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द करते हुए याची को सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है। हालांकि, सेवा में न रहने की अवधि का वेतन दिए जाने की मांग को कोर्ट ने नहीं माना है।

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वर्ष 2008 में याची का चयन विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण के लिए हुआ था। पांच जून 2012 को प्रशिक्षण पूरा होने के बाद याची ने 2014 में विज्ञापित सहायक अध्यापक भर्ती के तहत आवेदन किया। दो जुलाई 2016 को याची को सहायक अध्यापक नियुक्त किया गया। हालांकि, वर्ष 2017 में यह कहते हुए नोटिस जारी किया गया कि नियुक्ति के समय याची की आयु 50 वर्ष से अधिक थी। इसके आधार पर उनकी नियुक्ति को 2023 में शून्य घोषित कर दिया गया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एकल पीठ ने मुरादाबाद बीएसए के आदेश पर मुहर लगा दी।

इसके बाद याची ने एकल पीठ और बीएसए के आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी। खंडपीठ ने विशेष अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए पाया कि याची ने आवेदन में अपनी सही जन्मतिथि अंकित की थी और किसी तथ्य को छिपाया नहीं था। अदालत ने कहा कि यदि आयु गणना में कोई त्रुटि हुई तो वह नियुक्ति प्राधिकारी की थी, न कि याची की। कोर ने सुप्रीम कोर्ट के विकास प्रताप सिंह और राधेश्याम यादव मामलों का हवाला देते हुए कहा कि बिना धोखाधड़ी के हुई नियुक्ति को लंबे समय बाद निरस्त करना न्यायसंगत नहीं है।

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