इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति में लोक अदालत का केस खारिज करना गलत है। कोर्ट ने न्यायिक अधिकारी के आदेश को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने राजीव जैन की अर्जी पर दिया है। एटा निवासी राजीव ने चेक बाउंस मामले में ट्रायल कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर मामला नौ दिसंबर 2017 को लोक अदालत में आया। वहां बार-बार पुकारने पर भी शिकायतकर्ता की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ तो केस खारिज कर दिया गया। इस पर आवेदक ने आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि लोक अदालत को कोई भी लंबित मामला तभी सौंपा जा सकता है जब दोनों पक्षकार सहमत हों या किसी एक पक्षकार के आवेदन पर और न्यायालय को समझौते की संभावना दिखती हो। इस मामले में आवेदक की कोई सहमति नहीं ली गई और कोई सूचना भी नहीं दी गई। यदि पक्षकारों के बीच कोई समझौता या निपटारा नहीं हो पाता है तो लोक अदालत को मामले का रिकॉर्ड वापस उस अदालत को भेजना होता है जहां से वह प्राप्त हुआ था। लोक अदालत के लिए शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति के कारण मामले को खारिज करना या गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेना पूरी तरह से अवैध है। लोक अदालत के पारित आदेश को रद्द कर दिया। इसी के साथ मामले को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एटा को भेज दिया गया है।