हालांकि, अदालत ने माना कि छात्रा के मामले में देरी उसकी व्यक्तिगत लापरवाही के कारण नहीं, बल्कि पिता के निधन और शैक्षणिक सत्र में देरी जैसी असाधारण परिस्थितियों के कारण हुई। कोर्ट ने यह भी कहा कि एनसीटीई रेगुलेशन 2014 में ऐसी मानवीय आकस्मिक परिस्थितियों को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिससे छात्रों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
कोर्ट ने एनसीटीई को सुझाव दिया कि वास्तविक कारणों से परीक्षा से वंचित रहने वाले छात्रों को न्यूनतम योग्यता प्राप्त करने का निष्पक्ष अवसर देने के लिए आवश्यक हो तो नियमों में संशोधन पर भी विचार किया जाए।