याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट ने चुनौती दी। कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए याची के खिलाफ शुरू की गई 182 की कार्यवाही को रद्द कर दिया जबकि निचली अदालत द्वारा 156 (3) की अर्जी खारिज करने के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दौलतराम मामले में निर्धारित विधि व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 195 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन न किए जाने के कारण याची के खिलाफ शुरू की गई 182 की कार्यवाही अवैधानिक होने के साथ ही शून्य भी है। जबकि, 156(3) की अर्जी पर विवेचना करना या न करना निचली अदालत का विवेकाधीन शक्तियों का विषय है। निचली अदालत को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।