इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुशीनगर निवासी आरोपी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में लंबित दुष्कर्म के मुकदमे की पूरी कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की पीठ ने मोहम्मद रफी उर्फ बबलू खान की याचिका पर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुशीनगर निवासी आरोपी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में लंबित दुष्कर्म के मुकदमे की पूरी कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की पीठ ने मोहम्मद रफी उर्फ बबलू खान की याचिका पर दिया है।
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याची के खिलाफ तमकुहीराज थाने में दुष्कर्म, पॉक्सो और अवैध धर्मांतरण के आरोपों में एफआईआर दर्ज है। याची ने मुकदमे की पूरी कार्यवाही और आरोप पत्र को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याची अधिवक्ता विनीत विक्रम ने दलील दी कि घटना वर्ष 2018 की बताई गई है, जबकि एफआईआर वर्ष 2024 में दर्ज की गई।
कहा कि इस छह वर्ष से अधिक की देरी का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया है। जांच अधिकारी ने मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता का बयान दर्ज कराए बिना ही आरोप पत्र दाखिल कर दिया, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
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पीड़िता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में एक संक्षिप्त जवाबी हलफनामा दाखिल कर दलील दी कि पीड़िता को एफआईआर दर्ज होने की कोई जानकारी ही नहीं है और न ही उसने पुलिस को धारा 161 के तहत कोई बयान दिया है। हालांकि, सरकारी वकील ने इन तर्कों का विरोध करते हुए कहा कि एफआईआर में देरी अभियोजन के लिए घातक नहीं है और पीड़िता के गर्भवती होने के कारण उसे बयान दर्ज कराने के लिए मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया जा सका था।
अदालत ने पक्षों को सुनने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए विपक्षी दलों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। तब तक के लिए आरोपी के विरुद्ध चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी गई है।