सांसद के इस बयान को लेकर साधु संतों ने विरोध जताया था। इसके बाद उन्होंने माफी भी मांगी थी। लेकिन गाजीपुर की कोतवाली पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आरोप पत्र ट्रायल कोर्ट भेजा था। गाजीपुर की ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ तलबी आदेश जारी किया था।
इसके खिलाफ अफजाल अंसारी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, सुनवाई शुरू होने से पहले ही उनके अधिवक्ता उपेन्द्र उपाध्याय ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष उन्मोचन प्रार्थना पत्र या अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने की मोहलत मांगी। राज्य सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता की ओर से कोई आपत्ति नहीं की गई।
लिहाजा, कोर्ट ने 15 दिन की अंतरिम राहत देते हुए अफजाल अंसारी के खिलाफ किसी भी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। साथ ही ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि यदि उनकी ओर से उन्मोचन प्रार्थना पत्र या अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की जाती है तो सुप्रीम कोर्ट के सतेंद्र कुमार अंतिल के मामले में दिए गए दिशा निर्देश का पालन करते हुए मामले का शीघ्र निस्तारण किया जाए।