फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने कहा : चौकीदारों का वेतन बढ़ाना, न बढ़ाना सरकार का नीतिगत मामला, अदालत नहीं कर सकती हस्तक्षेप

Thu, 29 May 2025 03:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ग्राम चाैकीदार पुलिस बल की ‘तीसरी आंख’ हैं, उनके वेतन और सेवा शर्तों से जुड़े संशोधन पर फैसला लेना सरकार का काम है, अदालत का नहीं।
विज्ञापन
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ग्राम चाैकीदार पुलिस बल की ‘तीसरी आंख’ हैं, उनके वेतन और सेवा शर्तों से जुड़े संशोधन पर फैसला लेना सरकार का काम है, अदालत का नहीं। जब तक किसी कर्मचारी को दिया गया पारिश्रमिक स्पष्ट रूप से मनमाना, भेदभावपूर्ण या बेगार जैसा न हो, तब तक अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं है। हालांकि, सरकार को चौकीदारों के पद को ‘समकालीन समय में प्रभावी और जीवंत’ बनाए रखने के लिए उचित विधायी पहल करनी चाहिए।

विज्ञापन


इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की अदालत ने आगरा के लवकुश तिवारी समेत 1,486 याचियों की पुलिस बल व होमगार्ड के बराबर वेतन बढ़ाने की मांग वाली याचिका में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। कहा कि चाैकीदार को पुलिस बल की ‘तीसरी आंख’ माना जा सकता है। लेकिन, सेवा शर्तों के मुताबिक इनकी स्थिति पुलिसकर्मी या होमगार्ड के बराबर नहीं है। लिहाजा, ये समान वेतन के हकदार नहीं हैं।

याचियों का दावा

याचियों ने दलील दी कि वे वर्ष 1987 से ग्राम चौकीदार के रूप में काम कर रहे हैं। करीब 37 वर्षों में अर्थव्यवस्था में बदलाव हुआ है। इसके बावजूद उन्हें महीने में केवल 2,500 रुपये मानदेय दिया जाता है, जबकि उनका कार्य पुलिस बल के ही समान है। यह उनका शोषण है। संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 के उल्लंघन है। लिहाजा, वे सभी पुलिस कर्मियों के सामन वेतन भत्ते पाने के हकदार हैं।
विज्ञापन


सरकार की दलील

राज्य सरकार के अधिवक्ता ने दलील दी कि चौकीदारों को महीने में केवल दो दिन काम करना होता है। इन्हें दी जा रहीं सुविधाएं व मानदेय इनके काम के अनुरूप है। इन्हें कृषि व व्यावसायिक कार्य करने की स्वतंत्रता है।

चौकीदारों को पहली बार ब्रिटिश राज के दौरान नियुक्त किया गया था। उनके कामों पर तकनीकी प्रगति ने कब्जा कर लिया है। सरकार को बदलते दौर के साथ इनके बारे में सोचना चाहिए। - इलाहाबाद हाईकोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें