इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेहरू विद्यापीठ इंटर कॉलेज, गाजीपुर की प्रबंध समिति के चुनाव विवाद में फर्जी वकालतनामा दाखिल किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेहरू विद्यापीठ इंटर कॉलेज, गाजीपुर की प्रबंध समिति के चुनाव विवाद में फर्जी वकालतनामा दाखिल किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने याची व प्रतिवादी (आवेदक) पर 50-50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने शिव शंकर सिंह के पुनर्विलोकन आवेदन पर दिया है। कोर्ट ने पांच मई 2026 को मूल याचिका का निस्तारण कर शिक्षा निदेशक को दो माह में संस्था की प्रबंध समिति का चुनाव कराने का आदेश दिया था। इसके बाद प्रतिवादी शिव शंकर सिंह ने पुनर्विलोकन अर्जी दाखिल कर कहा कि उन्होंने कभी किसी अधिवक्ता को वकालतनामा नहीं दिया और न ही कैविएट दाखिल करने की सहमति दी थी। कोर्ट ने प्रयागराज स्थित फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी से हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट मंगाई।
जांच में सामने आया कि जिन हस्ताक्षरों को शिव शंकर सिंह ने अपना बताया था कि वे ही उनके नमूने और बैंक खाते में उपलब्ध हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते। इस तथ्य के सामने आने के बाद कोर्ट ने आवेदक (प्रतिवादी) शिव शंकर पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया। मूल याचिका में तथ्य छिपाने पर कोर्ट ने याची (अवधेश राय) पर भी 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया। साथ ही कोर्ट ने पांच मई 2026 के आदेश को वापस ले लिया और मामले को दोबारा सुनवाई के लिए संबंधित पीठ को भेज दिया।