याची अधिवक्ता अजय कुमार सिंह, आशीष सिंह ने दलील दी कि न्यायालय के पहले के आदेश का उल्लंघन किया गया है। रेंट-डीड के मौजूद न होने या वेब-पोर्टल पर अपलोड न होने के कारण पंजीकरण के नवीनीकरण से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
न्यायालय ने कहा कि सिविल कोर्ट ने अस्थायी निषेधाज्ञा आदेश जारी किया। इसके बाद भी नवीनीकरण आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया। सीएमओ के जानबूझकर कानून का उल्लंघन करने पर याची को अनावश्यक रूप से दो बार इस न्यायालय में आना पड़ा। न्यायालय ने याचिका स्वीकार कर सीएमओ को निर्देश दिया कि वह अस्पताल के पंजीकरण को तुरंत नवीनीकृत करें। यह आदेश सिविल जज (सीनियर डिवीजन), बेदखली आवेदन के फैसले के अधीन है।