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High Court : बायोमिट्रिक हाजिरी में है दिक्कत तो विभाग को जानकारी देना जरूरी, यह है पूरा मामला

Fri, 08 Aug 2025 09:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कर्मचारी साबित करते हैं कि उन्होंने जून 2025 में काम किया है तो उनका रोका गया वेतन जारी किया जाए। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के कर्मचारियों की याचिका निस्तारित कर दी है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कर्मचारी साबित करते हैं कि उन्होंने जून 2025 में काम किया है तो उनका रोका गया वेतन जारी किया जाए। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के कर्मचारियों की याचिका निस्तारित कर दी है। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश का यह मतलब नहीं है कि याचियों को बायोमीट्रिक उपस्थिति से छूट दे दी गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने वाराणसी के सत्य नारायण उपाध्याय व नौ अन्य की याचिका पर दिया है।

उर्जा जनशक्ति एप के माध्यम से बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं करने के आधार पर विभाग की ओर से जून 2025 का वेतन रोक दिया गया था। इस आदेश को कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि इंटरनेट की समस्या की वजह से कर्मचारी जून 2025 की उपस्थिति एप के माध्यम से नहीं लगा पाए। प्रतिवादी अधिवक्ता ने दलील दी कि बायोमीट्रिक हाजिरी सिस्टम 23 सितंबर 2024 की अधिसूचना के तहत लागू है। इसे चुनौती नहीं दी जा सकती। यह भी कहा कि किसी भी कर्मचारी ने इंटरनेट की समस्या के बारे में अधिकारियों को सूचित नहीं किया।

कोर्ट ने कहा कि यदि याचियों के साथ इंटरनेट की समस्या थी तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से विभाग से संपर्क करना चाहिए था। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि यदि कर्मचारी जून 2025 में ड्यूटी करना साबित करते हैं तो उन्हें रोका गया वेतन दिया जाए। यह भी कहा कि यह आदेश कर्मचारियों को एप के माध्यम से बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज करने से छूट नहीं देता है।

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