बेटियों की ओर से रजिस्ट्री से इन्कार करने पर खरीदार ने सिविल कोर्ट में वाद दाखिल किया था। अदालत ने खरीदार के पक्ष में फैसला सुनाया तो बेटियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। कहा कि खरीदार अस्पताल के मालिक उनके पारिवारिक डॉक्टर हैं। इसी अनुचित प्रभाव में उन्होंने उनके पिता से सस्ते में जमीन का सौदा कर लिया। यह भी दलील दी कि जमीन फ्रीहोल्ड भी नहीं कराई गई है।
कोर्ट ने बेटियों की अपील खारिज करते हुए कहा कि केवल पारिवारिक डॉक्टर होना अनुचित प्रभाव का सबूत नहीं है। वह भी तब जब अस्पताल प्रशासन ने न केवल समय पर भुगतान किया, बल्कि शेष 2.84 करोड़ रुपये भी अदालत में जमा कर दिए। लिहाजा, अनुबंध की शर्तों को पूरा करना विक्रेता के वारिसों की कानूनी बाध्यता है।
कोर्ट की टिप्पणी
विशिष्ट अनुपालन अधिनियम के तहत यदि खरीदार अपनी जिम्मेदारी निभाने को तैयार है तो विक्रेता के वारिस अनुबंध को ठंडे बस्ते में नहीं डाल सकते। विक्रेता की जिम्मेदारी थी कि वह जमीन फ्रीहोल्ड कराए। इसकी आड़ में वारिस खरीदार की रजिस्ट्री में रोड़ा नहीं खड़ा कर सकते। - हाईकोर्ट