इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या में दोषी पति को सजा की आधी अवधि पूरी करने पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की अदालत ने कासगंज निवासी रिंकू की आपराधिक अपील के साथ दाखिल दूसरी जमानत अर्जी पर दिया है।
मामला कासगंज का है। राखी की शादी रिंकू से 16 फरवरी 2012 को हुई थी। पांच सितंबर को वह आग से झुलस गई थी। इलाज के लिए उसे पहले आगरा, इसके बाद दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल ले जाया गया। वहां उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतका के पिता ने पति रिंकू समेत अन्य ससुराल वालों के खिलाफ दहेज हत्या की एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि दहेज में कार न मिलने से नाराज सुसराल वालों ने राखी को जलाकर मार डाला।
2021 में सत्र न्यायालय ने पति रिंकू को दोषी करार देते हुए आठ साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सजा निलंबित किए जाने की मांग की। साथ ही जमानत पर रिहाई भी मांगी, लेकिन पहली जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी।
इसके बाद दूसरी जमानत अर्जी दाखिल कर दलील दी कि छह सितंबर 2012 को मजिस्ट्रेट को दिए मृत्यु पूर्व बयान में मृतका ने पति या ससुराल के लोगों पर सीधे कोई आरोप नहीं लगाया और पति के साथ विवाद के बाद आत्महत्या की बात स्वीकार की। इसके अलावा याची ने सत्र अदालत से सुनाई गई सजा की आधी अवधि जेल में पूरी कर ली है।