इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तकनीकी कारणों से गलत प्रावधान में दाखिल याचिका को अदालत सही वैधानिक कार्यवाही में तब्दील करने की इजाजत दे सकती है। क्योंकि, महज तकनीकी आधार पर किसी पक्षकार को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तकनीकी कारणों से गलत प्रावधान में दाखिल याचिका को अदालत सही वैधानिक कार्यवाही में तब्दील करने की इजाजत दे सकती है। क्योंकि, महज तकनीकी आधार पर किसी पक्षकार को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की अदालत ने वायुसेना महाराजपुर ग्वालियर की ओर से आगरा की भुल्लर कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ दाखिल याचिका को मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम की धारा 37 के तहत अपील में तब्दील करने का आदेश दिया है।
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2002 में एक मध्यस्थ ने कंपनी के पक्ष में अवॉर्ड दिया था। केंद्र सरकार (वायुसेना) ने इस अवॉर्ड को चुनौती दी लेकिन आगरा के जिला जज ने 25 मार्च 2010 को आपत्तियां खारिज कर दीं। इसके खिलाफ सरकार ने पहले हाईकोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की जिसे बाद में अनुच्छेद 227 में बदल दिया गया। कंपनी की ओर से याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति दर्ज कराई गई।
दलील दी गई कि ऐसे मामलों में अपील का प्रावधान है। लिहाजा, याचिका को पोषणीयता के आधार पर रद्द कर दी जानी चाहिए। वहीं, केंद्र सरकार ने याचिका को अपील में बदलने की अनुमति मांगी। इस पर भी कंपनी ने आपत्ति उठाई। हालांकि, कोर्ट ने आपत्ति मानने से इन्कार कर दिया। कहा कि अदालत के पास याचिका को अपील में तब्दील करने की अनुमति देने का अधिकार है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन हफ्ते का समय देते हुए अनुमति दी कि वह याचिका को धारा-37 के तहत अपील में तब्दील कर दें। इसके बाद मामले की सुनवाई उचित पीठ के समक्ष होगी।