हाईकोर्ट ने खारिज की सरकार की दलील
सरकार ने दलील दी कि इन कर्मियों का नियमितीकरण एक अप्रैल 2005 के बाद हुआ था। ऐसे में ये कर्मचारी पुरानी पेंशन के हकदार नहीं हैं। कोर्ट ने सरकार के दावे को खारिज करते हुए कहा कि नियमानुसार 10 अप्रैल 2003 से पहले याचियों कर्मचारियों की नियमितीकरण की पात्रता बन चुकी थी। राज्य की लापरवाही या विलंब का खामियाजा कर्मचारी नहीं भुगतेंगे।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की सेवा को 10 अप्रैल 2003 से नियमित मानते हुए उनकी पेंशन की पुनः गणना की जाए। जो कर्मचारी पहले से प्राप्त कर रहे हैं, उनकी पेंशन पुनः निर्धारित होगी, लेकिन उनसे कोई वसूली नहीं की जाएगी। यह प्रक्रिया आदेश की प्रति प्रस्तुत करने के तीन महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है।