विभाग ने सामान को घटिया तो कहा पर इसके समर्थन में कोई भी लैब टेस्टिंग रिपोर्ट पेश नहीं की। कोर्ट ने चार मार्च का आदेश रद्द करते हुए दो सप्ताह के भीतर नए सिरे से स्वतंत्र जांच समिति का गठन करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस समिति का अध्यक्ष अतिरिक्त सचिव स्तर का अधिकारी होना चाहिए। लेकिन, इसमें उन जिलों के अधिकारी न हों जहां का यह विवाद है।
फर्म को विस्तार से कारण बताओ नोटिस दिया जाए और उसे अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाए। जब तक नई जांच पूरी नहीं होती, फर्म को भविष्य के टेंडरों में भाग लेने से नहीं रोका जाएगा। कोर्ट ने भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के तीन जुलाई 2020 के कार्यालय आदेश का हवाला दिया। भुगतान 10 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य है। यदि देरी होती है तो विभाग को एक प्रतिशत प्रति माह की दर से दंडात्मक ब्याज देना पड़ सकता है।