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High Court : पिता बच्चे की अभिरक्षा किसी को भी नहीं सौंप सकता, ऐसा दृष्टिकोण कानून और नैतिकता दोनों के विरुद्ध

Thu, 30 Apr 2026 01:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह कहना गलत है कि पिता अपने नाबालिग बच्चे की अभिरक्षा किसी भी व्यक्ति को सौंप सकता है और इस निर्णय को कोई चुनौती नहीं दे सकता।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह कहना गलत है कि पिता अपने नाबालिग बच्चे की अभिरक्षा किसी भी व्यक्ति को सौंप सकता है और इस निर्णय को कोई चुनौती नहीं दे सकता। ऐसा दृष्टिकोण कानून और नैतिकता दोनों के विरुद्ध है। इसके साथ ही कोर्ट ने एकलपीठ के आदेश को रद्द कर दिया।

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मामले को कानून के अनुसार पुनः निर्णय के लिए एकलपीठ को वापस भेज दिया। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने प्रयागराज के युवराज, आयुष्मान व अन्य की विशेष अपील पर दिया। मामले में याची के पिता ने बच्चों की अभिरक्षा उनकी मां को देने के बजाय अन्य व्यक्तियों को सौंप दी थी। इसे अवैध निरुद्धि बताते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई थी।

हालांकि, एकलपीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि पिता को अभिरक्षा स्थानांतरित करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि पिता भले ही नाबालिग का नैसर्गिक संरक्षक हो। लेकिन उसे यह असीमित अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह अपनी इच्छा से बच्चे की अभिरक्षा किसी तीसरे व्यक्ति को सौंप दे और दूसरे अभिभावक को इसे चुनौती देने से रोका जाए।

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