पुलिस ने विवेचना कर केवल पांच लोगों दरोगा, राकेश उर्फ लाल बाबू, चंद्रिका, मनोज व प्रमोद के खिलाफ धारा 147, 323, 504, 506 में चार्जशीट दाखिल की और राम कोमल, राजेश व भुंवर को झूठा फंसाना बताकर फाइनल रिपोर्ट पेश की। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लेकर पांचों अभियुक्तों को सम्मन जारी किया। पेश होने पर जमानत पर रिहा कर दिया।
शिकायतकर्ता ने एसपी देवरिया को विवेचना कोतवाली पुलिस सलेमपुर को स्थानांतरित करने की अर्जी दी। जिसे स्वीकार करते हुए विवेचना स्थानांतरित कर दी गई। कोतवाली पुलिस ने सभी आठ अभियुक्तों के खिलाफ दर्ज सभी धाराओं में चार्जशीट दाखिल की। मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लेकर याची व दो अन्य को सम्मन जारी किया है।
याची का कहना था कि चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के एसपी को विवेचना स्थानांतरित करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की नजीरों के हवाले से कहा कि पुलिस अधिकारी को कोर्ट के पुलिस रिपोर्ट पर संज्ञान लेने के बाद विवेचना अन्य एजेंसी या थाने को स्थानांतरित करने का अधिकार है। इसके लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी नहीं है।