इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली विभाग उपभोक्ता का पक्ष सुने बिना उस पर भारी जुर्माना नहीं थोप सकता। बिजली आपूर्ति संहिता के तहत उपभोक्ता को अनंतिम निर्धारण नोटिस (प्रोविजनल असेसमेंट नोटिस) के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराने और सुनवाई का पूरा अवसर मिलना अनिवार्य है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली विभाग उपभोक्ता का पक्ष सुने बिना उस पर भारी जुर्माना नहीं थोप सकता। बिजली आपूर्ति संहिता के तहत उपभोक्ता को अनंतिम निर्धारण नोटिस (प्रोविजनल असेसमेंट नोटिस) के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराने और सुनवाई का पूरा अवसर मिलना अनिवार्य है।
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इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने प्रयागराज के याची जतिन कुमार मोदनवाल की याचिका निस्तारित कर दी। साथ ही तीन महीने तक याची के खिलाफ किसी भी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। इस दौरान अधिकारियों को उपभोक्ता को सुनवाई का अवसर देते हुए उनकी आपत्तियों पर विचार करना होगा।
याची ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की 15 जुलाई 2024 की निरीक्षण रिपोर्ट और उसके आधार पर जारी 6,12,884 रुपये के भारी-भरकम प्रोविजनल असेसमेंट नोटिस को चुनौती दी थी। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि बिजली विभाग की जांच रिपोर्ट एकतरफा थी। उसकी आपत्तियों पर विचार किए बिना ही वसूली की मांग की जा रही है।
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कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर याची को चार सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत आपत्ति विभाग के समक्ष पेश करने का समय दिया है। साथ ही बिजली विभाग के अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे याची की आपत्तियों पर गौर करें, उसे व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दें और उसके बाद ही कोई अंतिम फैसला लें।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगले तीन महीने तक विभाग याची के खिलाफ किसी भी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं करेगा। हालांकि, याची की वर्तमान बिलों का भुगतान नियमित रूप से करना होगा।