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High Court : 43 साल पहले हुई हत्या में वृद्ध दोषी को मिली जमानत, हर महीने सीजेएम कोर्ट में देनी होगी हाजिरी

Thu, 09 Apr 2026 01:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या में सजायाफ्ता वृद्ध अपीलकर्ता की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। उसे कोर्ट की ओर से जारी गैर जमानती वारंट के आधार पर बरेली पुलिस ने पेश किया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ कर रही है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या में सजायाफ्ता वृद्ध अपीलकर्ता की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। उसे कोर्ट की ओर से जारी गैर जमानती वारंट के आधार पर बरेली पुलिस ने पेश किया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ कर रही है।

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अपीलकर्ता सुखदेव सिंह को पीलीभीत की सत्र अदालत ने 1983 में हुई हत्या में दोषी ठहराया था, जिसके खिलाफ 1989 से हाईकोर्ट में अपील लंबित है। सुनवाई के दौरान उपस्थित न होने पर कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। अपीलार्थी के अधिवक्ता ने दलील दी कि अत्यधिक वृद्ध और बीमार होने के कारण वह पिछली तारीख पर उपस्थित नहीं हो सका था। उसने पहले मिली जमानत का कभी भी दुरुपयोग नहीं किया।

इस पर कोर्ट ने अपीलकर्ता को हर महीने के तीसरे शनिवार को सीजेएम बरेली के समक्ष पेश होने व अपील की हर सुनवाई पर वकील की अनिवार्य उपस्थिति की शर्त पर निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। 22 अप्रैल को मामले की सुनवाई होगी। 

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ट्रेजरी घोटाले के आरोपी को मिली जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चित्रकूट के बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले से जुड़े मामले में आरोपी देव कुमार त्रिपाठी उर्फ बोग्गन त्रिपाठी की जमानत मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद यह आदेश पारित किया। चित्रकूट के कर्वी कोतवाली नगर थाने में देव के खिलाफ विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन्होंने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।

आवेदक के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। वह 26 जनवरी 2026 से जेल में बंद है। आवेदक का नाम एफआईआर में दर्ज नहीं था। कथित ट्रेजरी घोटाले की कोई भी राशि उसके बैंक खाते में प्राप्त नहीं हुई है। केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर एक बिचौलिए के रूप में आरोपित किया गया है। दूसरी ओर सरकारी अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो प्रतिभूतियों पर आवेदक को सशर्त रिहा करने का निर्देश दिया है।
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