किसी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई, संदेह होता है...
कोर्ट कहा कि हाल के दिनों में छोटे-छोटे अपराधों, जैसे चोरी या लूट के मामलों में भी पुलिस की ओर से मुठभेड़ दिखाकर आरोपियों के पैरों में गोली मारने की घटनाएं सामने आ रही हैं। वर्तमान मामले में किसी भी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई है। इससे संदेह होता है।
मुठभेड़ में मौत या गंभीर चोट की स्थिति में तुरंत दर्ज हो एफआईआर
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ‘पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र राज्य’ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मुठभेड़ में मौत या गंभीर चोट की स्थिति में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए और जांच स्वतंत्र एजेंसी, जैसे सीबीसीआईडी या किसी अन्य थाने की टीम से कराई जाए। घायल व्यक्ति का बयान मजिस्ट्रेट या मेडिकल अधिकारी के समक्ष दर्ज करना अनिवार्य होगा।
साथ ही मुठभेड़ के तुरंत बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को किसी प्रकार का पुरस्कार या पदोन्नति नहीं दी जाएगी। इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर मुठभेड़ करने वाली टीम व संबंधित जिले के पुलिस प्रमुख (एसपी/एसएसपी/कमिश्नर) भी सीधे तौर पर अदालत की अवमानना के जिम्मेदार होंगे। सुनवाई के दौरान अपर मुख्य सचिव (गृह) और डीजीपी ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।