इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंजाब नेशनल बैंक, बुलंदशहर के हेड कैशियर देवेंद्र कुमार शर्मा की बर्खास्तगी के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच में पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई और कोई अनियमितता सामने नहीं आई। इसलिए बैंक के आदेश में दखल का आधार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की अदालत ने दिया है। याची की ओर से अधिवक्ता नसीरुज्जमा ने पक्ष रखा जबकि बैंक की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र कुमार पांडेय और सुधा पांडेय ने बहस की।
मामला 2012 का है, जब ग्राहक मोबीन खान ने शिकायत की कि उसके बचत खाते से 12 हजार रुपये निकाल लिए गए हैं, जबकि उसने कोई चेक जारी नहीं किया था। जांच में देवेंद्र कुमार शर्मा की भूमिका पाई गई। उन्हें चार्जशीट दी गई, व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया और जांच अधिकारी की रिपोर्ट में आरोप साबित हो गए। इसके बाद कारण बताओ नोटिस देकर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। याची की अपील भी बैंक प्रबंधन ने खारिज कर दी थी। अंततः हाईकोर्ट ने भी बर्खास्तगी को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी।
आदेश की अवहेलना पर क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ.अशोक कुमार राणा को 28 अक्तूबर को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है। अदालत ने साथ ही स्पष्टीकरण हलफनामे की मांग करते हुए पूछा है कि आदेश की अवहेलना के लिए उनके खिलाफ अवमानना का आरोप क्यों न निर्मित किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की अदालत ने गाजियाबाद निवासी अश्वनी कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याची की ओर से अधिवक्ता राघवेंद्र मिश्र ने दलील दी कि एसीपी का लाभ दिया गया था लेकिन बाद में उसे निरस्त कर दिया गया और वेतन से कटौती शुरू कर दी गई। इस कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने पहले ही रोक लगा दी थी। अधिवक्ता ने कहा कि आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराने के बावजूद वेतन कटौती जारी रखी गई जो प्रत्यक्ष रूप से अदालत के आदेश की अवहेलना है। कोर्ट ने इसे गंभीर माना और टिप्पणी की कि प्रथमदृष्टया अवमानना का मामला बनता है। इसके बाद अदालत ने अधिकारी डॉ. राणा को तलब करते हुए व्यक्तिगत उपस्थिति और स्पष्टीकरण दाखिल करने का निर्देश जारी किया है।